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कश्मीर के इतिहास पर प्रदर्शनी

— जनता पर युद्ध के खिलाफ अभियान

कश्मीर में भारतीय सैनिक बलों द्वारा नागरिकों की हत्याओं के खिलाफ शरू हुए विरोध प्रदर्शनों को अब तीन माह से अधिक समय हो गया है. प्रदर्शनों का यह मौजूदा सिलसिला जून ११ को शरू हुआ जब भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा फेंके गए स्मोक बम से एक कश्मीरी किशोर की मौत हो गई. कश्मीर के लोगों ने  बहुत बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर इस हत्या का विरोध किया. इस हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देने के बजाय प्रदर्शनकारी जनता पर गोलियां चलाई गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, कर्फ्यू लगा दिया गया और बड़ी मात्र में लोगों को गिरफ्तार किया गया. सरकार के अपने ही आंकड़ों के अनुसार जून 11 से अब तक 81 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें बहुत सारे किशोर और एक आठ साल का बच्चा भी शामिल है. हालांकि भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाया  जा रहा यह अंतहीन दमन अभियान -जिसे कुख्यात ‘आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट’ का कानूनी सरंक्षण हासिल है- कश्मीरियों को डराने में विफल रहा है. वस्तुतः, फौजी क्रूरता के हर एक कृत्य ने और भी अधिक लोगों को सड़कों में लाने का काम किया है. सैनिक बलों द्वारा लगभग रोज़  ही  आम नागरिकों की हत्या से भारतीय राज्य और कश्मीरी जनता के बीच चल रहे दशकों पुराने इस संघर्ष में रोज़ नई कड़ियाँ जुड़ रही हैं.

आज कश्मीर ने हमें भारतीय जनतंत्र के बारें में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. जनवाद के क्षरण की यह प्रक्रिया कश्मीर में ही नहीं रुक जाएगी; यह हम सब को लील जाएगी. इस महत्वपूर्ण समय में नागरिक समाज और ख़ास कर छात्रों के लिए यह जरुरी हो गया है कि हम कश्मीर और इस के भविष्य के सवाल पर बहस में हस्तक्षेप करें. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर के मौजूदा जनप्रदर्शन और उनका दमन कोई अलग थलग घटना नहीं है. इसका सत्तर वर्ष का लम्बा इतिहास है. इस ऐतिहासिक सन्दर्भ को समझे बिना आज कोई भी बहस सार्थक नहीं हो सकती. यह खास तौर पर इसलिए भी जरुरी हो जाता है क्योंकि भारतीय ‘मुख्यधारा’ का मीडिया हमेशा की तरह इस मुद्दे  को ऐतिहासिक पृष्ठभूमि  से काट कर पेश करने की पुरजोर कोशिश में लगा हुआ है.

कश्मीर पर एक सुविचारित बहस की शुरुआत करने के लिए हम आपको कश्मीर के इतिहास पर प्रदर्शनी में आमंत्रित करते हैं.

कश्मीर के बारे में कुछ तथ्य :

  1. कश्मीर घाटी में सात लाख भारतीय सैनिक तैनात हैं
  2. हर 14 कश्मीरी लोगों पर एक सैनिक, विश्व का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र
  3. इस संघर्ष में 80,000 कश्मीरी लोग मारे जा चुके हैं. केवल पिछले तीन महीनों में ही 81 लोग मारे जा चुके हैं
  4. अंतराष्ट्रीय जन सुनवाई ने 2700 ऐसी सामूहिक कब्रों का सच उजागर किया जिनमे फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों को दफनाया गया था.
  5. कश्मीर यूनिवर्सिटी स्टुडेंट्स एसोसिएसन को प्रतिबंधित कर दिया गया है. हालिया हत्याओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले  15 छात्रों को UAPA  के तहत गिरफ्तार किया गया है.
कश्मीर के सात दशक, 1940-2010

स्थान: दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय

दिनांक: 21 सितंबर 2010

समय: 11 बजे से 3 बजे तक

September 19, 2010 - Posted by | articles, History, kashmir

2 Comments »

  1. Dear Moderator,
    Thanks for your continuous update on Kashmir issue. You openly informed everyone to join a good exhibition. but all the visitors who stay out of Delhi definitely face difficulty to join. That’s why, i have an humble request 2u to make us aware about exhibition and the issues by your comprehensive reporting, if its convenient and possible.

    Thanks

    Comment by nandan | October 11, 2010

  2. dear nandan,
    thanks for your comment. the event was a big success. despite of continuous raining big number of students turned out. unfortunately we did not take photographs of the programme. there was a discussion in dse lawns alongside the programme. i am unable to post a comprehansive report due to lack of time. this is the link of factsheet distributed in the exhibition. —
    http://resistanceagainstoppression.blogspot.com/2010/10/seven-decades-of-kashmir-1940-2010-fact_375.html

    Comment by parisar | October 11, 2010


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