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एक अमरीकी करोड़पति का सौ साल पहले लिया गया इन्टरव्यू

माँ जैसी क्लासिक रचना लिखने वाले महान रूसी साहित्यकार मैक्सिम गोर्की आज से क़रीब सौ साल पहले अमरीका गए थे पार्टी के लिए धन इकठ्ठा करने और समाजवाद के प्रचार हेतु। उनके तब के लिखे लिखे लेख एक पुस्तक की सूरत में सामने आए। 

पेश है उसी ज़रूरी किताब के एक अध्याय का पहला भाग, यहाँ अशोक पांडे जी के ब्लॉग कबाड़खाना से साभार ।

गणतन्त्र का एक सम्राट

… संयुक्त राज्य अमेरिका के इस्पात और तेल के सम्राटों और बाकी सम्राटों ने मेरी कल्पना को हमेशा तंग किया है। मैं कल्पना ही नहीं कर सकता कि इतने सारे पैसेवाले लोग सामान्य नश्वर मनुष्य हो सकते हैं।

मुझे हमेशा लगता रहा है कि उनमें से हर किसी के पास कम सप कम तीन पेट और डेढ़ सौ दांत होते होंगे। मुझे यकीन था कि हर करोड़पति सुबह छ: बजे से आधी रात तक खाना खाता रहता होगा। यह भी कि वह सबसे महंगे भोजन भकोसता होगा : बत्तखें¸ टर्की¸ नन्हे सूअर¸ मक्खन के साथ गाजर¸मिठाइयां¸ केक और तमाम तरह के लजीज व्यंजन। शाम तक उसके जबड़े इतना थक जाते होंगे कि वह अपने नीग्रो नौकरों को आदेश देता होगा कि वे उसके लिए खाना चबाएं ताकि वह आसानी से उसे निगल सके। आखिरकार जब वह बुरी तरह थक चुकता होगा¸ पसीने से नहाया हुआ¸ उसके नौकर उसे बिस्तर तक लाद कर ले जाते होंगे। और अगली सुबह वह छ: बजे जागता होगा अपनी श्रमसाध्य दिनचर्या को दुबारा शुरू करने को।

लेकिन इतनी जबरदस्त मेहनत के बावजूद वह अपनी दौलत पर मिलने वाले ब्याज का आधा भी खर्च नहीं कर पाता होगा।

निश्चित ही यह एक मुश्किल जीवन होता होगा। लेकिन किया भी क्या जा सकता होगा? करोड़पति होने का फायदा ही क्या अगर आप और लोगों से ज्यादा खाना न खा सकें? 

मुझे लगता था कि उसके अंतर्वस्त्र बेहतरीन कशीदाकारी से बने होते होंगे¸ उसके जूतों के तलुवों पर सोने की कीलें ठुकी होती होंगी और हैट की जगह वह हीरों से बनी कोई टोपी पहनता होगा। उसकी जैकेट सबसे महंगी मलमल की बनी होती होगी। वह कम से कम पचास मीटर लम्बी होती होगी और उस पर सोने के कम से कम तीन सौ बटन लगे होते होंगे। छुट्टियों में वह एक के ऊपर एक आठ जैकेटें और छ: पतलूनें पहनता होगा। यह सच है कि ऐसा करना अटपटा होने के साथ साथ असुविधापूर्ण भी होता होगा … लेकिन एक करोड़पति जो इतना रईस हो बाकी लोगों जैसे कपड़े कैसे पहन सकता है … 

करोड़पति की जेबें उस गडढे जैसी होती होंगी जिनमें वह समूचा चर्च¸ सीनेट की इमारत और छोटी मोटी जरूरतों को रख सकता होगा … लेकिन जहां एक तरफ मैं सोचता था कि इन महाशय के पेट की क्षमता किसी बड़े समुद्री जहाज के गोदाम जितनी होती होगी मुझे इन साहब की टांगों पर फिट आने वाली पतलून के आकार की कल्पना करने में थोड़ी हैरानी हुई। अलबत्ता मुझे यकीन था कि वह एक वर्ग मील से कम आकार की रजाई के नीचे नहीं सोता होगा। और अगर वह तम्बाकू चबाता होगा तो सबसे नफीस किस्म का और एक बार में एक या दो पाउण्ड से कम नहीं। अगर वह नसवार सूंघता होगा तो एक बार में एक पाउण्ड से कम नहीं। पैसा अपने आप को खर्च करना चाहता है …

उसकी उंगलियां अद्भुत तरीके से संवेदनशील होती होंगी और उनमें अपनी इच्छानुसार लम्बा हो जाने की जादुई ताकत होती होगी : मिसाल के तौर पर वह साइबेरिया में अंकुरित हो रहे एक डालर पर न्यूयार्क से निगाह में रख सकता था। अपनी सीट सेे हिले बिना वह बेरिंग स्टेट तक अपना हाथ बढ़ाकर अपना पसंदीदा फूल तोड़ सकता था।

अटपटी बात यह है कि इस सब के बावजूद मैं इस बात की कल्पना नहीं कर पाया कि इस दैत्य का सिर कैसा होता होगा। इसके अलावा मुझे लगा कि वह सिर मांसपेशियों और हडि्डयों का ऐसा पिण्ड होता होगा जिसकी गति को फकत हर एक चीज से सोना चूस लेने की इच्छा से प्रेरणा मिलती होगी। लब्बोलुबाब यह है कि करोड़पति की मेरी छवि एक हद तक अस्पष्ट थी। संक्षेप में कहूं तो सबसे पहले मुझे दो लम्बी लचीली बांहें नजर आती थीं। उन्होंने ग्लोब को अपनी लपेट में ले रखा था और उसे अपने मुंह की भूखी गुफा के पास खींच रखा था जो हमारी धरती को चूसता चबाता जा रहा था : उसकी लालचभरी लार उसके ऊपर टपक रही थी जैसे वह तन्दूर में सिंका कोई स्वादिष्ट आलू हो …

आप मेरे आश्चर्य की कल्पना कर सकते हैं जब एक करोड़पति से मिलने पर मैंने उसे एक निहायत साधारण आदमी पाया।

एक गहरी आरामकुर्सी पर मेरे सामने एक बूढ़ा सिकुड़ा सा शख्स बैठा हुआ था जिसके झुरीर्दार भूरे हाथ शान्तिपूर्वक उसकी तोंद पर धरे हुए थे। उसके थुलथुल गालों पर करीने से हजामत बनाई गई थी और उसका ढुलका हुआ निचला होंठ बढ़िया बनी हुई उसकी बत्तीसी दिखला रहा था जिसमें कुछेक दांत सोने के थे। उसका रक्तहीन और पतला ऊपरी होंठ उसके दांतों से चिपका हुआ था और जब वह बोलता था उस ऊपरी होंठ में जरा भी गति नहीं होती थी। उसकी बेरंग आंखों के ऊपर भौंहें बिल्कुल नहीं थीं और सूरज में तपा हुए उसके सिर पर एक भी बाल नहीं था। उसे देख कर महसूस होता था कि उसके चेहरे पर थोड़ी और त्वचा होती तो शायद बेहतर होता ; लाली लिए हुए¸ गतिहीन और मुलायम वह चेहरा किसी नवजात शिशु के जैसा लगता था। यह तय कर पाना मुश्किल था कि यह प्राणी दुनिया में अभी अभी आया है या यहां से जाने की तैयारी में है …

उसकी पोशाक भी किसी साधारण आदमी की ही जैसी थी। उसका धारण किया हुआ सोना घड़ी अंगूठी और दांतों तक सीमित था। कुल मिलाकर शायद वह आधे पाउण्ड से कम था। आम तौर पर वह यूरोप के किसी कुलीन घर के पुराने नौकर जैसा नजर आ रहा था …

जिस कमरे में वह मुझसे मिला उसमें सुविधा या सुन्दरता के लिहाज से कुछ भी उल्लेखनीय नहीं था। फ़र्नीचर विशालकाय था पर बस इतना ही था।

उसके फ़र्नीचर को देखकर लगता था कि कभी कभी हाथी उसके घर तशरीफ लाया करते थे।

“क्या आप … आप … ही करोड़पति हैं?” अपनी आंखों पर अविश्वास करते हुए मैंने पूछा। 

” हां हां!” उसने सिर हिलाते हुए जवाब दिया।

मैंने उसकी बात पर विश्वास करने का नाटक किया और फैसला किया कि उसकी गप्प का उसी वक्त इम्तहान ले लूं।
“आप नाश्ते में कितना बीफ़ खा सकते हैं ?” मैंने पूछा।

“मैं बीफ़ नहीं खाता” उसने घोषणा की “बस सन्तरे की एक फांक एक अण्डा और चाय का छोटा प्याला …”

बच्चों जैसी उसकी आंखों में धुंधलाए पानी की दो बड़ी बूंदों जैसी चमक आई और मैं उनमें झूठ का नामोनिशान नहीं देख पा रहा था।

“चलिए ठीक है” मैंने संशयपूर्वक बोलना शुरू किया “मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे ईमानदारी से बताइए कि आप दिन में कितनी बार खाना खाते हैं ?”

“दिन में दो बार” उसने ठण्डे स्वर में कहा “नाश्ता और रात का खाना। मेरे लिए पर्याप्त होता है। रात को खाने में मैं थोड़ा सूप थोड़ा चिकन और कुछ मीठा लेता हूं। कोई फल। एक कप काफी। एक सिगार …”

मेरा आश्चर्य कद्दू की तरह बढ़ रहा था। उसने मुझे सन्तों की सी निगाह से देखा। मैं सांस लेने को ठहरा और फिर पूछना शुरू किया:

” लेकिन अगर यह सच है तो आप अपने पैसे का क्या करते हैं ?”

उसने अपने कन्धों को जरा उचकाया और उसकी आंखें अपने गड्ढों में कुछ देर लुढ़कीं और उसने जवाब दिया:

“मैं उसका इस्तेमाल और पैसा बनाने में करता हूं …”

“किस लिए ?”

“ताकि मैं और अधिक पैसा बना सकूं …”

“लेकिन किस लिए ?” मैंने हठपूर्वक पूछा।

वह आगे की तरफ झुका और अपनी कोहनियों को कुर्सी के हत्थे पर टिकाते हुए तनिक उत्सुकता से पूछा:

“क्या आप पागल हैं ?”

“क्या आप पागल हैं ?” मैंने पलट कर जवाब दिया।

बूढ़े ने अपना सिर झुकाया और सोने के दांतों के बीच से धीरे धीरे बोलना शुरू किया :

“तुम बड़े दिलचस्प आदमी हो … मुझे याद नहीं पड़ता मैं कभी तुम्हारे जैसे आदमी से मिला हूं …”

उसने अपना सिर उठाया और अपने मुंह को करीब करीब कानों तक फैलाकर खामोशी के साथ मेरा मुआयना करना शुरू किया। उसके शान्त व्यवहार को देख कर लगता था कि स्पष्टत: वह अपने आप को सामान्य आदमी समझता था। मैंने उसकी टाई पर लगी एक पिन पर जड़े छोटे से हीरे को देखा। अगर वह हीरा जूते ही एड़ी जितना बड़ा होता तो मैं शायद जान सकता था कि मैं कहां बैठा हूं।

“और अपने खुद के साथ आप क्या करते हैं?”

“मैं पैसा बनाता हूं।” अपने कन्धों के तनिक फैलाते हुए उसने जवाब दिया।

“यानी आप नकली नोटों का धन्धा करते हैं” मैं खुश होकर बोला मानो मैं रहस्य पर से परदा उठाने ही वाला हूं। लेकिन इस मौके पर उसे हिचकियां आनी शुरू हो गईं। उसकी सारी देह हिलने लगी जैसे कोई अदृश्य हाथ उसे गुदगुदी कर रहा हो। वह अपनी आंखों को तेज तेज झपकाने लगा।

“यह तो मसखरापन है” ठण्डा पड़ते हुए उसने कहा और मेरी तरफ एक गीली संतुष्ट निगाह डाली। “मेहरबानी कर के मुझसे कोई और बात पूछिए” उसने निमंत्रित करते हुए कहा और किसी वजह से अपने गालों को जरा सा फुलाया।

मैंने एक पल को सोचा और निश्चित आवाज में पूछा: 

“और आप पैसा कैसे बनाते हैं?” 

“अरे हां! ये ठीकठाक बात हुई!” उसने सहमति में सिर हिलाया। “बड़ी साधारण सी बात है। मैं रेलवे का मालिक हूं। किसान माल पैदा करते हैं। मैं उनका माल बाजार में पहुंचाता हूं। आप को बस इस बात का हिसाब लगाना होता है कि आप किसान के वास्ते बस इतना पैसा छोड़ें कि वह भूख से न मर जाए और आपके लिए काम करता रहे। बाकी का पैसा मैं किराए के तौर पर अपनी जेब में डाल लेता हूं। बस इतनी सी बात है।” 

“और क्या किसान इस से संतुष्ट रहते हैं?” 

“मेरे ख्याल से सारे नहीं रहते!” बालसुलभ साधारणता के साथ वह बोला “लेकिन वो कहते हैं ना लोग कभी संतुष्ट नहीं होते। ऐसे पागल लोग आपको हर जगह मिल जाएंगे जो बस शिकायत करते रहते हैं …”

“तो क्या सरकार आप से कुछ नहीं कहती ?” आत्मविश्वास की कमी के बावजूद मैंने पूछा। 

“सरकार?” उसकी आवाज थोड़ा गूंजी फिर उसने कुछ सोचते हुए अपने माथे पर उंगलियां फिराईं। फिर उसने अपना सिर हिलाया जैसे उसे कुछ याद आया हो: “अच्छा … तुम्हारा मतलब है वो लोग … वाशिंगटन वाले? ना वो मुझे तंग नहीं करते। वो अच्छे बन्दे हैं … उनमें से कुछ मेरे क्लब के सदस्य भी हैं। लेकिन उनसे बहुत ज्यादा मुलाकात नहीं होती … इसी वजह से ऐसा होना ही होता है कि कभी कभी मैं उनके बारे में भूल जाता हूं। ना वो मुझे तंग नहीं करते।” उसने अपनी बात दोहराई और मेरी तरफ उत्सुकता से देखते हुए पूछा:

“क्या आप कहना चाह रहे हैं कि ऐसी सरकारें भी होती हैं जो लोगों को पैसा बनाने से रोकती हैं?” 

मुझे अपनी मासूमियत और उसकी बुद्धिमत्ता पर कोफ्त हुई। 

“नहीं” मैंने धीमे से कहा “मेरा ये मतलब नहीं था ॰॰॰ देखिए सरकार ने कभी कभी तो सीधी सीधी डकैती पर लगाम लगानी चाहिए ना ॰॰॰” 

“अब देखिए! ” उसने आपत्ति की “ये तो आदर्शवाद हो गया। यहां यह सब नहीं चलता। व्यक्तिगत कार्यों में दखल देने का सरकार को कोई हक नहीं ॰॰॰” 

जब हमारे मुल्क में बहुत सारे ऐसे आप्रवासी हो जाएंगे जो कम पैसे पर काम करें और खूब सारी चीजें खरीदें तब सब कुछ ठीक हो जाएगा.

उसकी बच्चों जैसी बुद्धिमत्ता के सामने मैं खुद को बहुत छोटा पा रहा था। 

“लेकिन अगर एक आदमी कई लोगों को बर्बाद कर रहा हो तो क्या वह व्यक्तिगत काम माना जाएगा?” मैंने विनम्रता के साथ पूछा। 

“बबार्दी?” आंखें फैलाते हुए उसने जवाब देना शुरू किया ” बर्बादी का मतलब होता है जब मजदूरी की दरें ऊंची होने लगें। या जब हड़ताल हो जाए। लेकिन हमारे पास आप्रवासी लोग हैं। वो खुशी खुशी कम मजदूरी पर हड़तालियों की जगह काम करना शुरू कर देते हैं। जब हमारे मुल्क में बहुत सारे ऐसे आप्रवासी हो जाएंगे जो कम पैसे पर काम करें और खूब सारी चीजें खरीदें तब सब कुछ ठीक हो जाएगा।”

वह थोड़ा सा उत्तेजित हो गया था और एक बच्चे और बूढ़े के मिश्रण से कुछ कम नजर आने लगा था।उसकी पतली भूरी उंगलियां हिलीं और उसकी रूखी आवाज मेरे कानों पर पड़पड़ाने लगी:

“सरकार? ये वास्तव में दिलचस्प सवाल है। एक अच्छी सरकार का होना महत्वपूर्ण है उसे इस बात का ख्याल रहता है कि इस देश में उतने लोग हों जितनों की मुझे जरूरत है और जो उतना खरीद सकें जितना मैं बेचना चाहता हूं; और मजदूर बस उतने हों कि मेरा काम कभी न थमे। लेकिन उससे ज्यादा नहीं! फिर कोई समाजवादी नहीं बचेंगे। और हड़तालें भी नहीं होंगी। और सरकार ने बहुत ज्यादा टैक्स भी नहीं लगाने चाहिए। लोग जो देना चाहें वह मैं लेना चाहूंगा। इसको मैं कहता हूं अच्छी सरकार।”

“वह बेवकूफ नहीं है। यह एक तयशुदा संकेत है कि उसे अपनी महानता का भान है।” मैं सोच रहा था। “इस आदमी ने वाकई राजा ही होना चाहिए …”

“मैं चाहता हूं” वह स्थिर और विश्वासभरी आवाज में बोलता गया “कि इस मुल्क में अमन चैन हो। सरकार ने तमाम दार्शनिकों को भाड़े पर रखा हुआ है जो हर इतवार को कम से कम आठ घण्टे लोगों को यह सिखाने में खर्च करते हैं कि कानून की इज्ज्त की जानी चाहिए। और अगर दार्शनिकों से यह काम नहीं होता तो वह फौज बुला लेती है। तरीका नहीं बल्कि नतीजा ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। गाहक और मजदूर को कानून की इज्ज्त करना सिखाया जाना चाहिए। बस!” अपनी उंगलियों से खेलते हुए उसने अपनी बात पूरी की।

“नहीं यह शख्स बेवकूफ नहीं है। राजा तो यह हर्गिज नहीं हो सकता।” मैंने विचार किया और फिर उससे पूछा : “क्या आप मौजूदा सरकार से संतुष्ट हैं?” 

उसने तुरन्त जवाब नहीं दिया। 

“असल में वो जितना कर सकती है उस से कम कर रही है। मैं कहता हूं : आप्रवासियों को फिलहाल देश में आने देना चाहिए। लेकिन हमारे यहां राजनैतिक आजादी है जिसका वो लुत्फ उठाते हैं सो उन्हें इसकी कीमत देनी चाहिए। उन में से हर किसी ने अपने साथ कम से कम पांच सौ डालर लाने चाहिए। ऐसा आदमी उस आदमी से दस गुना बेहतर है जिसके पास फकत पचास डालर हों। जितने भी बुरे लोग होते हैं : मिसाल के लिए आवारा, गरीब, बीमार और बाकी ऐसे ही, वो भी किसी काम के नहीं हाते।” 

“लेकिन” मैंने श्रमपूर्वक कहा “इस की वजह से आप्रवासियों की तादाद कम होने लगेगी।” 

बूढ़े ने सहमति में सिर हिलाया। 

“मैं प्रस्ताव दूंगा कि कुछ समय के बाद उनके लिए हमारे देश के दरवाजे हमेशा के लिए बन्द कर दिए जाएं ॰॰॰ लेकिन फिलहाल के लिए हर किसी ने अपने साथ थोड़ा बहुत सोना लेकर आना चाहिए ॰॰॰ जो हमारे देश के लिए अच्छा होगा। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि यहां के हिसाब से ढलने के लिए उन्हें ज्यादा समय दिया जाए। समय के साथ साथ यह सारा पूरी तरह बन्द कर दिया जाना चाहिए। अमेरीकियों के लिए जो भी काम करना चाहे वह इस के लिए आजाद हे लेकिन यह कतई जरूरी नहीं कि उन्हें भी अमरीकी नागरिकों की तरह अधिकार दिए जाएं। वैसे भी हमने पर्याप्त अमेरिकी पैदा कर लिए हैं। उन में से हर कोई हमारी आबादी बढ़ा पाने में सज्ञाम है। यह सब सरकार का सिरदर्द है। लेकिन इस सब को एक दूसरे आधार पर व्यवस्थित किए जाने की जरूरत है। सरकार के सारे सदस्यों को औद्योगिक इकाइयों में शेयर दिए जाने चाहिए ताकि वे देश के फायदे की बात अच्छे से और जल्दी सीख सकें। फिलहाल तो मुझे सीनेटरों को खरीदना है ताकि मैं उन्हें ॰॰॰ इस या उस बात के लिए पटा सकूं। तब उसकी जरूरत भी नहीं पड़ेगी।”

उसने आह भरी और अपनी टांग को झटकते हुए जोड़ा :

“जिन्दगी को सही कोण से देखने के लिए आपको बस सोने के पहाड़ की चोटी पर खड़ा होना होता है”

“और धर्म के बारे में आप का क्या ख्याल है?” अब मैंने प्रश्न किया जबकि वह अपना राजनैतिक दृष्टिकोण स्पष्ष्ट कर चुका था।

“अच्छा!” उसने उत्तेजना के साथ अपने घुटनों को थपथपाया और बरौनियों को झपकाते हुए कहा : “मैं इस बारे में भली बातें सोचता हूं। लोगों के लिए धर्म बहुत जरूरी है। इस बात पर मेरा पूरा यकीन है। सच बताऊं तो मैं खुद इतवारों को चर्च में भाषण दिया करता हूं … बिल्कुल सच कह रहा हूं आप से।” 

“और आप क्या कहते हैं अपने भाषणों में?” मैंने सवाल किया। 

“वही सब जो एक सच्चा ईसाई चर्च में कह सकता है!” उसने बहुत विश्वस्त होकर कहा। “देखिए मैं एक छोटे चर्च में भाषण देता हूं और गरीब लोगों को हमेशा दयापूर्ण शब्दों और पितासदृश सलाह की जरूरत होती है … मैं उनसे कहता हूं …”

एक क्षण को उस के चेहरे पर बच्चों का सा भाव आया और उसने अपने होंठों को आपस में कस कर चिपका लिया। उसकी निगाह छत की तरफ उठी जहां कामदेव के शर्माते हुए चाकर एक मांसल औरत के निर्वसन शरीर को छिपा रहे थे। औरत का बदन यार्कशायर की किसी घोड़ी की तरह गुलाबी था। छत के रंग उसकी बेचमक आंखों में प्रतिविम्बित हुए और उनमें एक कौंध रेंग आई। फिर उसने शान्त स्वर में बोलना शुरू किया :

“ईसामसीह के भाइयो और बहनो! ईष्र्या के दैत्य के लालच से खुद को बचाओ और दुनियादारी से भरी चीजों को त्याग दो। इस धरती पर जीवन संक्षिप्त होता है : बस चालीस की आयु तक आदमी अच्छा मजदूर बना रह सकता है। चालीस के बाद उसे फैक्ट्रियों में रोजगार नहीं मिल सकता। जीवन कतई सुरक्षित नहीं है। काम के वक्त आपके हाथों का एक गलत काम और मशीन आपकी हडि्डयों को कुचल सकती है। एक सनस्ट्रोक और आपकी कहानी खत्म हो सकती है। हर कदम पर बीमारी और दुर्भाग्य कुत्ते की तरह आपका पीछा करते रहते हैं। एक गरीब आदमी किसी ऊंची इमारत की छत पर खड़े दृष्टिहीन आदमी जैसा होता है। वह जिस दिशा में जाएगा अपने विनाश में जा गिरेगा जैसा जूड के भाई फरिश्ते जेम्स ने हमें बताया है। भाइयो आप को दुनियावी चीजों से बचना चाहिए। वह मनुष्य को तबाह करने वाले शैतान का कारनामा है। ईसामसीह के प्यारे बच्चो तुम्हारा सामाज्य तुम्हारे परमपिता के सामाज्य जैसा है। वह स्वर्ग में है। और अगर तुम में धैर्य होगा और तुम अपने जीवन को बिना शिकायत किए बिना हल्ला किए बिताओगे तो वह तुम्हें अपने पास बुलाएगा और इस धरती पर तुम्हारी कड़ी मेहनत के परिणाम के बदले तुम्हें ईनाम में स्थाई शान्ति बख्शेगा। यह जीवन तुम्हारी आत्मा की शुद्धि के लिए दिया गया है और जितना तुम इस जीवन में सहोगे उतना ज्यादा आनन्द तुम्हें मिलेगा जैसा कि खुद फरिश्ते जूड ने बताया है।”

उसने छत की तरफ इशारा किया और कुछ देर सोचने के बाद ठण्डी और कठोर आवाज में कहा:

“हां मेरे प्यारे भाइयो और बहनो अगर आप अपने पड़ोसी के लिए चाहे वह कोई भी हो इसे कुर्बान नहीं करते तो यह जीवन खोखला और बेहद आम है। ईर्ष्या के राक्षस के सामने अपने दिलों को समर्पित मत करो। किस चीज से ईर्ष्या करोगे? जीवन के आनन्द धोखा भर होते हैं; राक्षस के खिलौने। हम सब मारे जाएंगे¸ अमीर और गरीब¸ राजा और कोयले की खान में काम करने वाले मजदूर¸ बैंकर और सड़क पर झाड़ू लगाने वाले। यह भी हो सकता है कि स्वर्ग के उपवन में आप राजा बन जाएं और राजा झाड़ू लेकर रास्ते से पत्तियां साफ कर रहा हो और आपकी खाई हुई मिठाइयों के छिलके बुहार रहा हो। भाइयो¸ यहां इस धरती पर इच्छा करनो को है ही क्या? पाप से भरे इस घने जंगल में जहां आत्मा बच्चों की तरह पाप करती रहती है।प्यार और विनम्रता का रास्ता चुनो और जो तुम्हारे नसीब में आता है उसे सहन करो। अपने साथियों को प्यार दो उन्हें भी जो तुम्हारा अपमान करते हैं …”

(… जारी है)

January 26, 2009 - Posted by | articles

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