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Archive for January 30th, 2008

बिलकीस को सलाम

Posted by parisar on January 30, 2008

बिलकीस बानो के मामले में तेरह लोगों को सज़ा सुनाई गई है पर क्या सिर्फ वे ही गुनाहगार थे ? बिलकीस के अलावा बेस्ट बेकरी,गुलबर्गा सोसायटी,नरोदा पटिया का इन्साफ होना बाक़ी है क्या इनके खून के निशान २००२ से और पीछे नहीं जाते ? क्या उस व्यक्ति को कभी अदालतें हाजिर होने का हुक्म सुनायेंगी जिसने गुजरात से ही वह रथ निकाला था जिससे पूरे देश में मुसलमानों के खिलाफ घृणा और हिंसा क प्रचार किया गया था और जो इस देश का गृहमंत्री रह चुका है और प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहा है ? या उस व्यक्ति को जो भारत रत्न होने की इच्छा रखता है, लेकिन जिसने गुजरात में बिलकीस पर हमले का औचित्य यह कह कर खोजने की कोशिश की थी कि गोधरा में आग पहले किसने लगाई या उसे जिसने यह कहा था कि बिलकीस जैसे बलात्कार और पेट चीर कर भ्रूण जलाना एक आम घटना है जिसे जरुरत से ज्यादा गंभीरता से लेने कि आवश्यकता नहीं ? या उस अखबार को जिसने इस घटना के दो रोज़ पहले यह खबर छापी, जो पूरी तरह मनगढ़ंत थी कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस पर हमले में दो लड़कियों को अगवा करके उनके साथ बुरी तरह बलात्कार करके, उनकी छाती काट के लाशों को कालोल के एक तालाब में फेंक दिया गया है ? या उस संगठन को जो कई सालों से पर्चे छाप कर बाँट रहा था कि हर साल गुजरात में दस हज़ार हिंदू लड़कियों का बलात्कार किया जाता है मुसलमान मर्द हिन्दू लड़कियों को अगवा कर उन्हें खराब करते हैं

क्या बिलकिस का बलात्कार एक क्षणिक आवेश में भीड़ ने किया या यह बरसों से नफरत के सुसंगठित प्रचार कि परिणति थी जिसकी ओर से राज्य और न्याय प्रणाली ने आँखे मूँद रखे थी ? क्या किसी सभ्य समाज में इस तरह के घृणा के प्रचार कि इजाज़त दी जा सकती है ? लेकिन इस समाज को अपनी नागरिक नैतिकता के बारे में अभी बहुत सोचने कि जरूरत है,जिसका सबसे बड़ा और सदी का महान अभिनेता मुम्बई के उस मुजरिम के साथ तस्वीरें खिचवानें में गौरव का अनुभव करता है जो रोज़ रोज़ मुसलमानों के खिलाफ नफरत का प्रचार करता रहा है और जिसने बाबरी मस्जिद के गिरा दिए जाने पर ख़ुशी ज़ाहिर की थी

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