चिदंबरम पर कोई एक मुकदमा तो ठोंके
Posted by parisar on January 19, 2008
( चन्द्रभूषण के ब्लॉग पहलू से हमारे वित्तमंत्री, जिन्होंने भारत सरकार को चूना लगाने के लिए एनरोन की ओर से भारत सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की, के नए कारनामे पर टिप्पणी)–
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम पर वित्तीय मामलों से जुड़ी अपनी वकील पत्नी को सरकारी पद के दुरुपयोग के जरिए लाभ पहुंचाने का आरोप साबित हो जाने के बावजूद मामला किसी तरह रफा-दफा हो गया था। तब से अबतक छिटपुट ऐसे कई प्रकरण गिनाए जा सकते हैं, जब किसी न किसी औद्योगिक घराने को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने कोई न कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष हरकत की है। लेकिन इस बार तो हद ही पार हो गई।
रिलायंस पॉवर का आईपीओ आया और पहले ही दिन संस्थागत निवेशकों ने उसकी जोरदार लिवाली की। ठीक उसी शाम वित्तमंत्री ने बाकायदा बयान जारी करके बताया कि साल की शुरुआत में ही आए आईपीओज की जबर्दस्त कामयाबी भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती को दर्शाती है। गौरतलब है कि इस बयान के समय रिलायंस पॉवर के अलावा सिर्फ फ्यूचर कैपिटल का आईपीओ बाजार में मौजूद था, जिसका आकार रिलायंस पॉवर की तुलना में नगण्य ही माना जा सकता है।
बाजार का खाका देखने से बिल्कुल साफ जाहिर था कि अमेरिकी मंदी दुनिया की हर अर्थव्यवस्था पर कुछ न कुछ चोट करने जा रही है। जहां-तहां इसके असर भी नजर आने लगे थे। लेकिन वित्तमंत्री के बयान के असर में न सिर्फ रिलायंस पॉवर का आईपीओ अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा हिट हुआ, बल्कि संस्थागत विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद खुदरा भारतीय निवेशकों ने ऊर्जा, इन्फ्रास्टक्चर, वित्त और ब्रोकरेज कंपनियों में निवेश जारी रखा। इसके चलते कई बार बाजार दिन में सात सौ प्वाइंट तक गिरकर भी दोबारा उठ गया और मात्र दो-ढाई सौ प्वाइंट नीचे बंद हुआ। आज, यानी ठीक रिलायंस पॉवर का आईपीओ बंद होने के दिन गुब्बारे में जबर्दस्ती भरी हुई सारी हवा निकल गई और शेयर बाजार सीधे रसातल में चला गया। आम तौर पर भारतीय वित्तमंत्री बाजार में अतिरिक्त चढ़ाव देखकर खुदरा निवेशकों को सावधान करते आए हैं, लेकिन चिदंबरम इस पद पर काबिज ऐसे अकेले शख्स हैं, जो अपने शेयर बाजारों का अतिरिक्त फुलाव और विश्व तथा भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे स्पष्ट खतरे को देखते हुए भी खुदरा निवेशकों को बाजार में खुला खेलने के लिए उकसाते पाए गए हैं।वित्तीय कानाफूसी वाली वेबसाइटों पर कई अधिकृत दलालों के इस आशय के बयान मौजूद हैं, जिनमें कहा गया है कि वित्तमंत्री जब खुद ही भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की तस्दीक कर रहे हैं, तो जिसकी झोली में जो कुछ भी है- और नहीं है तो कहीं से कर्ज-कुआम लेकर भी- इस आईपीओ महायज्ञ में अब झोंक ही डाले। जरूरत पड़ने पर इन बयानों का इस्तेमाल दलील और सबूत की तरह किया जा सकता है।मुझे कानूनी प्रक्रियाओं का कोई ज्ञान नहीं है, न ही बाजार में वित्तमंत्रियों के महीन खेल से मेरी ज्यादा वाकफियत है, लेकिन खुले हाथों कर्जा बांट रहे बैंकों से रुपया उठाकर आईपीओ और शेयरों में पैसा लगाने वाला कोई निवेशक अगर शेयर बाजार की इस ‘दिगंबरम गति ‘ के चलते दीवालिया हो जाता है तो उसे चिदंबरम के खिलाफ कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए।सरकारी पद के दुरुपयोग, विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला तो वित्तमंत्री पर बिल्कुल साफ बनता है, जिसे आधार बनाकर किसी सक्षम व्यक्ति को तत्काल उनके विरुद्ध याचिका दायर कर देनी चाहिए।




January 27, 2008 at 7:15 am
He’s also involved in the GoldQuest, http://www.quest.net
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