Posted by parisar on January 2, 2008
This entry was posted on January 2, 2008 at 2:57 pm and is filed under Art, कविता, हिन्दी.
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January 8, 2008 at 5:50 pm
प्रिय सम्पादक महोदय
आपने ब्लॉग पर जो कविता दी है, वो काफ़ी अच्छी है लेकिन आपने लेखक का नाम शायद “वेणु गोपाल” है .
January 8, 2008 at 6:33 pm
मैं भी यही जानता था कि यह कविता वेणुगोपाल की है. मैंने इसे कई पोस्टरों में पढा था. लेकिन कला कम्यून ने लेखक की जगह पर चारुलता का नाम लिखा है.मुझे नाम बदलना अच्छा नहीं लगा और शायद इसे बदलना सम्भव भी नही था.